नर्मदा नदी से निकलने वाले शिवलिंग को नर्मदेश्वर कहते हैं यह घर में भी स्थापित किए जाने वाला पवित्र और चमत्कारी शिवलिंग है जिसके पूजा अत्यंत फलदाई है आज हम जानते हैं ऐसे क्यों कहा जाता है कि नर्मदा नदी का हर पत्थर शिवलिंग है तो आइए जानते हैं
स्कंदपुराण की कथा के अनुसार एक बार भगवान शंकर ने पार्वती जी को भगवान विष्णु के शयनकाल (चातुर्मास) में द्वादशाक्षर मंत्र ( ओम नमो भगवते वासुदेवाय ) का जाप करते हुए तप करने के लिए कहा। पार्वती जी शंकर जी से आज्ञा लेकर चातुर्मास शुरू होने पर हिमालय पर्वत पर तपस्या करने लगी। उनके साथ उनकी सखियां भी थी। पार्वती जी के तपस्या में लीन होने पर शंकर भगवान पृथ्वी पर विचरण करने लगे।
एक बार भगवान शंकर यमुना तट पर विचरण कर रहे थे। यमुना जी की चलती हुई तरंगों को देखकर वे यमुना में स्नान करने के लिए जैसे ही जल में घुसे उनके शरीर की अग्नि के तेज से यमुना का जल काला हो गया । अपने श्याम स्वरूप को देखकर यमुना जी ने प्रकट होकर शंकर जी की स्तुति कि इससे खुश होकर शंकर जी ने कहा यह क्षेत्र ' हरतीर्थ' कहलाएगा व इसमें स्नान से मनुष्य के पाप नष्ट हो जाएंगे।
एक और प्रसंग है जिसमें भगवान शिव यमुना के किनारे हाथ में डमरू लिए, माथे पर त्रिपुंड लगाए बढ़ी हुई जटाओं के साथ मनोहर दिगंबर रूप में मुनियों के घरों में घूमते हुए नृत्य कर रहे थे ।कभी वह गीत गाते, कभी मौज में नृत्य करते थे, तो कभी हंसते थे, कभी क्रोध करते थे और कभी मौन हो जाते थे।
उनके इस सुंदर रूप पर मुग्ध होकर बहुत सी मुनि पत्नियां भी उनके साथ नृत्य करने लगी। मुनि शिव को इस भेस में पहचान नहीं सके बल्कि उन पर क्रोध करने लगे । मुनियों ने क्रोध में आकर शिव को श्राप दे दिया कि तुम लिंग रूप हो जाओ शिवजी जी वहां से अदृश्य हो गए उनका लिंग रूप अमरकण्टक पर्वत के रूप में प्रकट हुआ और वहां से नर्मदा नदी प्रकट हुई इस कारण नर्मदा में जितने पत्थर हैं वह सब शिव रूप है
नर्मदेश्वर शिवलिंग के संबंध में एक अन्य कथा है - भारतवर्ष में गंगा, यमुना, नर्मदा और सरस्वती यह 4 नदियां सर्वश्रेष्ठ हैं इनमें भी इस भूमण्डल पर गंगा की समता करने वाली कोई नदी नहीं है। प्राचीनकाल में नर्मदा नदी ने बहुत वर्षों तक तपस्या करके ब्रह्मा जी को प्रसन्न किया । प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने वर मांगने को कहा, तब नर्मदा ने जी ने कहा ब्राह्मण यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मुझे गंगा जी के समान कर दीजिए।
ब्रह्मा जी ने मुस्कुराते हुए कहा- 'यदि कोई दूसरा देवता भगवान शिव की बराबरी कर ले, कोई दूसरा पुरुष भगवान विष्णु के समान हो जाए, कोई दूसरी नारी पार्वती जी के समानता कर ले और कोई दूसरी नगरी काशीपुरी की बराबरी कर ले कर सके तो कोई दूसरी नदी भी गंगा के सामान हो सकती है 'ब्रह्मा जी की बात सुनकर नर्मदा उनके वरदान का त्याग करके काशी चली गई और वहां पिलपिलातीर्थ में शिवलिंग की स्थापना करके तप करने लगी। भगवान शंकर उन पर बहुत प्रसन्न हुए और वर मांगने के लिए कहा। तब नर्मदा ने कहा - 'भगवान! तुच्छ वर मांगने से क्या लाभ? बस आपके चरणकमलों में मेरी भक्ति बनी रहे।'
नर्मदा की बात सुनकर भगवान शंकर बहुत प्रसन्न हो गए और बोले- 'नर्मदे ! तुम्हारे तट पर जितने भी प्रस्तरखण्ड (पत्थर) हैं , वे सब मेरे वर से शिवलिंगरूप हो जाएंगे । तुमने जो नर्मदेश्वर शिवलिंग की स्थापना की है, वह पुण्य और मोक्ष देने वाला होगा।' भगवान शंकर उसी लिंग में लीन हो गए इतनी पवित्रता पाकर नर्मदा भी प्रसन्न हो गई इसलिए कहा जाता है - 'नर्मदा का हर कंकर शंकर है'
"हर हर महादेव""हर हर महादेव"
0 Response to " नर्मदा नदी का हर पत्थर शिव लिंग के आकार का होता है... इसके पीछे हैं दुर्लभ रहस्य...."
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