पूरी दुनिया कोरोनावायरस की महामारी से प्रभावित हो चुकी है । जनवरी में यह चीन से बाहर फैला और धीरे-धीरे पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया । जान बचाने के लिए हर संभव कोशिश की गई। करीब 11 महीने बाद भी कोरोनावायरस से छुटकारा नहीं मिल पाया है । अब केवल वैक्सीन ही है जिससे हम उम्मीद कर सकते हैं कि है कोरोनावायरस की महामारी को रोक सके।
18 दिसंबर को ब्रिटेन में कोरोनावायरस का नया स्ट्रेन मिलने से वैज्ञानिकों में चिंता बढ़ गई है । इस नए स्ट्रेन पर सभी वैक्सीन के बेअसर होने का खतरा भी बना हुआ है | WHO और यूरोपीय संघ के ड्रग रेगुलेटर का कहना है कि वैक्सीन नए स्ट्रेन पर असरदार है या नहीं इसके सबूत आने अभी बाकी है। उम्मीद यही की जा रही है कि जल्द ही वैक्सीन के तौर पर कोरोनावायरस के खिलाफ दीवार खड़ी हो जाएगी।
तो आइए जानते हैं कोरोनावायरस और वैक्सीन के बारे में पूरी जानकारी....
कोरोनावायरस के हमले पर हमारे शरीर का रिस्पांस क्या होता है
हमारे शरीर में एंटीजन प्रेजेंटिंग सेल (APC) नाम का इम्यून सेल पाया जाता है। यह सेल पहचान कर लेता है कि कोई बाहरी वायरस हमारे शरीर में सक्रिय हुआ है। यह पहले वायरस को घेरता है और एक वायरल प्रोटीन बनाता है जिसे एंटीजन कहते हैं। यह एंटीजन शरीर के इम्यून सिस्टम को सक्रिय करता है जिससे हमें पता चलता है कि किसी वायरस में हमारे शरीर पर हमला किया है और हमें इसके इलाज की आवश्यकता है ।
इम्यून सिस्टम के सक्रिय होकर वायरस पर हावी होने तक का समय बीमारी का होता है। इस दौरान बुखार, खांसी, गले में जकड़न, सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। अगर मरीज को डायबिटीज, दिल की बीमारी या कोई अन्य बीमारी है तो इम्यून रिस्पांस के सक्रिय होने से पहले ही वायरस अपनी संख्या बढ़ा चुका होता है अगर सही इलाज ना मिले तो मरीज की मौत हो सकती है।
अब जानते हैं कि वायरस से लड़ने में वैक्सीन की जरूरत क्यों होती है
सबसे पहला सवाल की वैक्सीन क्या होता है....
वैक्सीन एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है जिनके शरीर वायरस से लड़ने को तैयार नहीं है। जितने ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगा होगा उतने ज्यादा लोग वायरस से सुरक्षित रहेंगे और ऐसा करने से ही हर्ड इम्यूनिटी आएगी। हर्ड इम्यूनिटी एक सेंटिफिक टर्म है, जिसका मतलब है कि ज्यादातर लोगों के शरीर वायरस से लड़ने की स्थिति में आ चुके हैं।
तो आइए जानते हैं हर्ड इम्यूनिटी कैसे बनती है
यदि कुछ ही लोगों को वैक्सीन लगा हो.... तो वायरस की ताकत ज्यादा होगी.... इससे यदि एक इंसान संक्रमित हो तो वह और लोगों तक उसे फैला सकता है
यदि कई लोगों को वैक्सीन लगा हो तब वायरस की ताकत कम होगी... तब संक्रमण आगे नहीं फैलता और हर्ड इम्यूनिटी विकसित होती है
कितने तरह के वैक्सीन बन रहे हैं करोना से बचाने के लिए...
दुनिया भर के वैज्ञानिक ने वैक्सिंग बनाने के लिए अलग-अलग तरीके निकाले हैं सब का एक ही उद्देश्य है कि शरीर को वायरस से बचाने के लिए तैयार करना यानी एंटीजन बनाना ताकि शरीर उसे पहचान सके और लड़ने के काबिल बन सके इस समय दुनिया भर में 6 तरह के वैक्सिंग बन रहे हैं....
1. जीवित वायरस
2. इनएक्टिवेटेड वायरस
3. प्रोटीन सबयूनिट
4. वायरस जैसे पार्टिकल
5. डी एन ए-आर एन ए
6. वायरल वेटर
वैक्सिंग के अप्रूवल का प्रोसेस कैसा होता है
वैक्सीन के अप्रूवल के लिए कई प्रोसेस होते हैं...
1. प्री-क्लिनिकल टेस्टिंग:
वैक्सीन का टेस्ट लैब में जानवरों पर होता है इम्यून रिस्पांस देखकर तय होता है उसका क्या होना चाहिए
2. फेस-1 सेफ्टी ट्रायल्स:
कुछ वॉलिंटियर्स को चुनकर उन्हें वैक्सीन लगाया जाता है उनके शरीर में कैसे रिएक्ट किया इसके आधार पर टेस्ट के नतीजों का एनालिसिस होता है
3. फेस 2 एक्सपेंडेंड ट्रायल्स:
अब वैक्सीन अलग-अलग उम्र के ग्रुप को लगाते हैं इससे वैक्सीन की सेफ्टी और इम्यून सिस्टम को stimu-let करने की क्षमता देखी जाती है
4. फेस 3 एफीकेसी ट्रायल्स:
यह अंतिम स्टेज के ट्रायल्स हैं। हजारों लोगों को वैक्सीन लगाते हैं कुछ महीनों की निगरानी होती है कितने लोगों ने कैसे रिस्पांस दिया उस पर एफिकेसी तय होती है
5. अप्रूवल प्रोडक्शन:
फेस 3 के नतीजों के आधार पर हर देश का ड्रग रेगुलेटर सेफ्टी और इफेक्टिवेनेस के आधार पर व्यक्ति को अप्रूवल देता है तब उसका प्रोजेक्शन शुरू होता है
यह थी औपचारिक प्रक्रिया इसमें कई साल लग जाते हैं डब्ल्यूएचओ (WHO) ने कोरोनावायरस को महामारी घोषित किया है और इस वजह से व्यक्ति की तत्काल जरूरत है कुछ देशों में इमरजेंसी या शुरुआती अप्रूवल का तरीका अपनाया है यानी जो वैक्सीन फेस वन या फेस टू में इफेक्टिव देखे उन्हें भी अप्रूवल दे दिया है इससे इसके बाद भी कुछ देश फेस 3 के ट्रायल के बिना अप्रूवल नहीं देना चाहते हैं
समय कम है तो सरकारों ने क्या प्रक्रिया तय की है...
वैक्सीन बनाने में कई साल लग जाते हैं कोरोनावायरस के जितने भी वैक्सीन बने हैं और अप्रूवल के करीब पहुंचे हैं वह एक रिकॉर्ड है दुनिया में इतनी तेजी से इससे पहले कभी वैक्सीन नहीं बनाया इसके बाद भी महामारी से निपटने के लिए वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन (WHO)के साथ दुनिया भर के ड्रग रेगुलेटर ने नियम बदले हैं
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