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जिसे पैदा होते ही गाड़ दिया गया जमीन में, घंटों बाद भी जमीन से निकली जिंदा। लोगों ने दिया था ''डायन" नाम पर... अपनी कामयाबी से कराया सबका मुंह बंद.....

जिसे पैदा होते ही गाड़ दिया गया जमीन में, घंटों बाद भी जमीन से निकली जिंदा। लोगों ने दिया था ''डायन" नाम पर... अपनी कामयाबी से कराया सबका मुंह बंद.....

 

दोस्तों आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसी शख्सियत के बारे में जिसे पैदा होते ही जमीन में जिंदा दफन कर दिया गया था, परंतु कई घंटों बाद भी उसकी सांसे चलती मिली।  जिसे उसी के कबीले के लोगों ने जान से मारने की कोशिश, जिसे दिया गया था ''डायन'' नाम। परंतु अपनी मेहनत और लगन से पूरे संसार में अपना नाम चमकाया, पद्मश्री से भी सम्मानित हुई और बिग बॉस 5 की सदस्य रह चुकी गुलाबो सपेरा के बारे में....


हम बात कर रहे हैं राजस्थान की लोक नृत्यांगना गुलाबो सपेरा की जो घुमंतू कालबेलिया समुदाय से है। इस समुदाय के लोग सपेरे होते हैं और सांप को नचाकर गुजारा करते हैं गुलाबो का जन्म 1960 में राजस्थान के अजमेर जिले के कोटड़ा गांव में हुआ था वह वही वक्त था जब राजस्थान के कई हिस्सों में बेटियों को पैदा होते ही मार दिया जाता था क्योंकि उन्हें अभिशाप समझा जाता था गुलाबो सपेरा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था जिसका जिक्र उन्होंने बिग बॉस 5 में किया था उस सीजन में गुलाबो बतौर कंटेस्टेंट शामिल हुई थी और अपनी दुख भरी जिंदगी का किस्सा सुनाया था। 

पैदा होते ही क्यों गाड़ दिया था जमीन में

गुलाबो सपेरा ने बताया था कि जब उनका जन्म हुआ तो पिता घर से दूर थे। रिश्तेदारों और वहां मौजूद लोगों ने जब देखा कि बेटी पैदा हुई है तो, उन्होंने ले जाकर जमीन में जिंदा ही दफन कर दिया।  इस बारे में तब गुलाबों के मां-बाप को पता नहीं था जन्म के बाद होश आने पर जब गुलाबों की मां को मालूम हुआ कि बेटी को पैदा होते ही जमीन में गाड़ दिया गया तो वह रोने लगी। 


मां ने मौसी के साथ मिलकर निकाला था बाहर

तब उन्होंने सब लोगों से विनती की कि उन्हें उस जगह का पता बता दे जहां गुलाबों को दफनाया गया है वह देखना चाहती है।  पर कोई भी उसकी बात माना नहीं गुलाबो ने बताया था कि उसकी मौसी को इस बात की जानकारी थी कि गुलाबों को कहां दफन किया गया है बाद में  उनकी मां को उस जगह पर ले गई तब मां और मौसी ने मिलकर गुलाबों को जमीन खोदकर बाहर निकाला तो देखा उसकी सांसे चल रही थी। 

लड़की को माना जाता था अभिशाप

दरअसल गुलाबो घुमंतु समुदाय से हैं और उस समुदाय में लड़कियों का पैदा होना अच्छी बात नहीं मानी जाती।  (बीबीसी) को दिए एक इंटरव्यू में गुलाबो सपेरा ने बताया था, ''घुमंतु समुदाय के हैं तो वहां लड़की पैदा होना अच्छी बात नहीं मानी जाती उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता, पालने से लेकर शादी तक के खर्च, सब फालतू माने जाते हैं इसलिए वहां के लोग बेटी को पैदा होते ही जमीन में जिंदा गाड़ देते हैं ताकि वह धीरे-धीरे मर जाए। कई बार तो गड्ढा खोद कर उस पर घास डालकर बेटी को मरने के लिए छोड़ देते हैं

पापा सांप  नचा ते  और गुलाबो भी नाचती थी

मां यह सब चीजें नहीं मानती थी इसलिए गुलाबों को घर ले आई।  माँ ने अपनी तीन अन्य बेटियों के साथ पाला।  गुलाबों के पिता बेटियों से बहुत प्यार करते थे उनकी तीन बेटियां थी क्योंकि वह देवी मां के उपासक थे इसलिए बेटियों को उनका ही रूप मानते थे वह सांप को को नचाने का काम करते थे।  गुलाबों के पिता का डर था कि वह कहीं उनकी बेटी को मार ना दे इसलिए वह जब सांप नचाने जाते थे तो गुलाबों को भी साथ ले जाते थे गुलाबो ने सांपों के साथ नाचना सीख लिया गांव गांव जाकर पापा सांप नचाते तो गुलाबों भी साथ नाचती  और शरीर पर सांप लपेट कर सांप की तरह ही कालबेलिया डांस करती। 


डायन कहकर बुलाते थे लोग

कई लोग गुलाबों सपेरा को डायन तक बुलाते थे क्योंकि वह जमीन से जिंदा निकली थी और फिर थोड़ी बड़ी होने पर नाचना शुरू कर दिया था इसका जिक्र गुलाबो ने एक इंटरव्यू में दिया था कि गुलाबों के पिता गांव-गांव घूमकर सांप नचाते थे तब गुलाबो ने भी उनके साथ नाचना शुरू कर दिया था और पिता के साथ गांव गांव जाकर कालबेलिया डांस करने लगी वह सांपों को अपने शरीर से लपेट कर खूब नाचती 

गुलाबो ने दुनिया भर में पहुंचाया कालबेलिया डांस।  तब गुलाबो ने  है डांस शुरू किया था तब लोग इसके बारे में ज्यादा नहीं जानते थे लेकिन धीरे-धीरे गुलाबों को कालबेलिया डांस से ही पहचान मिलने लगी गुलाबो सपेरा ने कालबेलिया डांस को ही एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है वह दुनियाभर में परफॉर्म कर चुकी है और दूर-दूर से लोग कालबेलिया डांस सीखने आते हैं


ऐसे अचानक से पलटी गुलाबों की किस्मत सब कुछ बदल गया

गुलाबो सपेरा 80 के दशक में वह पुष्कर में एक मेले के दौरान नाच रही थी और तब वहां उनके डांस को देख सब हैरान रह गए वहीं गुलाबों को एक कार्यक्रम में परफॉर्म करने का मौका मिला इसके बाद तो गुलाबों सपेरा ने पीछे मुड़कर देखा ही नहीं उन्होंने लंदन से अमेरिका तक परफॉर्म किया। 



साल 2016 में हुई पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित

सन 2016 में गुलाबो सपेरा को पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया । गुलाबो सपेरा की प्रसिद्धि के बाद उनके समुदाय में लड़कियों को मारना बंद कर दिया गया और वह अपनी सबसे बड़ी जीत और कामयाबी मानती है। 



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