हरिद्वार:अग्नि अखाड़े के ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी रसानंद महाराज की विधवा तेजेंद्र कौर ने अब अग्नि अखाड़े के संतों से आर-पार की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है। उनका कहना है, कि जिस प्रकार के कारनामे अखाड़े के अंदर लंबे समय से चले आ रहे हैं उनका वे पर्दाफाश करेंगी। अग्नि अखाड़े की पेशवाई से पूर्व व इन कारनामों को मीडिया के सामने रखेंगी।
प्रेस को जारी बयान में, उन्होंने कहा कि, ''अग्नि अखाड़े ने उनकी संपत्ति को खुर्द बुर्द करने का कार्य किया है। जिन संपत्तियों पर अखाड़े का अधिकार नहीं था, उन संपत्तियों को भी खुर्द बुर्द किया गया है। इसके लिए गलत तथ्यों का सहारा लिया गया है। उनका कहना है कि वे इसके लिए लड़ाई लड़ रही हैं और इस लड़ाई को अब और तेज किया जाएगा। शीघ्र ही वे अग्नि अखाड़े में चल रहे कारनामों का पर्दाफाश करेंगी।
बता दें कि हरिद्वार में अखाड़ा और धार्मिक ट्रस्टों की भूमि को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है। बेशकीमती जमीनों को हथियाने के लिए कई बार संतों के खून से धरती लाल हुई है और कई संतों का आज तक पता नहीं चल पाया।
और यह मामला हरिद्वार के कनखल क्षेत्र में है यहां स्वामी रसानंद जो दिवंगत हो चुके हैं कि पूर्व शिष्य और खुद को स्वामी रसानंद की विधवा बताने वाली तेजेंद्र कौर ने हरिद्वार के संत स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी पर धार्मिक ट्रस्ट की संपत्ति को धोखेबाजी से बेचने का आरोप लगाया है। इस मामले में थाना-चौकी-कोर्ट-कचहरी से लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है सब अपना दावा कर रहे हैं लेकिन सच क्या है यह बड़ा सवाल है।
जानिए आखिर क्या है विवाद
कनखल में शिवडेल स्कूल के बगल में करीब 7 बीघा जमीन का एक टुकड़ा है, जिसे कनखल का प्रॉपर्टी कारोबारी जतिन हांडा स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी से खरीदने का दावा कर रहे हैं। जहां हांडा अखाड़े में मुंशी से प्रॉपर्टी डीलर बने आशीष शर्मा उर्फ टुली का भांजा बताया जाता है। आशीष शर्मा टुल्ली महंत सुधीर गिरि हत्याकांड में जेल भी जा चुका है। ट्रस्ट की इस जमीन को बेचे जाने का विरोध स्वामी रसानंद की कथित विधवा तेजेंद्र कौर कर रही है क्योंकि तेजेंद्र कौर का तर्क है कि यह जमीन ट्रस्ट की है और ट्रस्ट की जमीन को बेचने का हक स्वामी कैलाशानंद को नहीं है यही नहीं तेजेंद्र कौर का आरोप है कि गलत तरीके से स्वामी कैलाशानंद ने स्वामी रसानंद की जमीनों को उनके मरने के बाद अपने नाम म्यूटेशन करा लिया। जिस पर उन्हें स्टे मिला हुआ है।
असल में स्वामी रसानंद अग्नि अखाड़े के संत थे और नियमानुसार अखाड़े के संत के मरने के बाद सारी संपत्ति अखाड़े के पास ही चली जाती है। फिर भी इस संपत्ति को बेचा नहीं जा सकता है, हालांकि जिस संपत्ति पर विवाद है वह अखाड़े की ना होकर ट्रस्ट के अधीन बताई जा रही है जिस पर तेजेंद्र कौर अपना दावा पेश कर रही है।
क्या कहती है तेजेंद्र कोर
तेजेंद्र कौर का कहना है कि स्वामी रसानंद ने उनसे शादी की थी और उनके नाम एक वसीयत भी की थी। यही नहीं स्वामी रसानंद ने उनसे पत्नी के तौर पर जिस्मानी ताल्लुक बनाएं और उनकी कोख से स्वामी रसानंद के बच्चे को जन्म दिया। स्वामी रसानंद ने एक ट्रस्ट में अपनी निजी संपत्ति को ट्रस्ट के अधीन लाए और अब स्वामी रसानंद के मरने के बाद अखाड़े ने स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी को केयरटेकर बना दिया लेकिन वह धोखाधड़ी कर संपत्तियों को बेचने का काम कर रहे हैं। संत की हत्या के आरोपी आशीष शर्मा उर्फ टुल्ली के जरिए जतिन हांडा जो कि उनका अपना सगा रिश्तेदार है और एक ही ऑफिस से प्रॉपर्टी का काम करते हैं, को जमीन बेच दी। जबकि हमें स्टे मिला हुआ है। उन्होंने कहा कि आशीष शर्मा के कहने पर उन्हें धमकाया जा रहा है और स्टे के बाद भी वहां काम किया जा रहा है।
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